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हिन्दी कविता- सवेरा (Hindi poem for kids)





सूरज की क्रिरने आती हैं
सारी कलियाँ खिल जाती हैं
अंधकार सब खो जाता है
सब जग सुंदर हो जाता है

चिड़ियाँ गति है मिल जुलकर
बहते है उनके मीठे स्वर
ठंडी ठंडी हवा सुहानी
चलती है जैसे मस्तानी

नई ताज़गी नई कहानी
नया जोश पाते हैं प्राणी
खो देते है आलस सारा
और काम लगता है प्यारा

सुबह भली लगती है उनको
मेहनत प्यारी लगती जिनको
अगर सुबह भी अल्सा जाए
तो क्या जग सुंदर हो पाए
श्री प्रसाद

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