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हिन्दी कविता- भोले भाले बादल (Hindi poem for kids)





झब्बर झब्बर बालोंवाले
गुब्बारे से गालों वाले
लगे दौड़ने आसमान में
झूम झूम कर काले बदल !
आपस में टकराते रह रह
शेरॉन से मतवाले बादल

कुछ तो लगते हैं तूफ़ानी
कुछ रह रह करते शतानी
कुछ अपने थैलों से, चुपके से
झर झर झर बरसते पानी
नहीं किसी की सुनते कुछ भी
ढोलक ढोल बजाते बदल !

रह रहकर छत पर आ जाते
फिर चुपके से उपर उड़ जाते
कभी कभी जिद्दी बन करके
बाढ़ नदी नालों में लाते
फिर भी लगते बहुत भले हैं
मान के भोले भाले बादल !
कल्पनाथ सिंह

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