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हिन्दी कविता- लहरों का गीत(Hindi poem for kids)





माँ ये लहरें भी गाती है
कल कल छल छल के मधुर स्वरों में
अपने गीत सुनाती है!
मैं देख रही थी अभी अभी
ये भी मुझ जैसी मचल रही
क्या जाने अब क्या मिला इन्हे
भर भर उमंग में उछल रहीं
तट से आ आकर हंस-हंसकर
अपनी बातें कह जाती हैं
माँ ये लहरें भी गाती हैं!

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