Home

हिन्दी कविता- मिन मिन मिंकु (Hindi poem for kids)





मिन मिन मिंकु बड़े सयाने
घर के नौकर बड़े पुराने
मुँह में दाँत सिर्फ़ दो चार
फिर भी जाते नित बाजार,
घर का फल और मेवा लाते
बच्चो को खुद बैठ खिलाते,
नित वह नई कहानी कहते
बच्चे सुनकर हंसते रहते,
हँसते-हँसते सब सो जाते
मिन मिन मिंकु खुश हो जाते !

More hindi Poems for kids