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हिन्दी कविता- दिशाएँ (Hindi poem for kids)





आओ बच्चे तुम्हें बताएँ
होती है कुल चार दिशाएँ

जिधर से निकले सूरज राम,
उसको लो तुम पूरब मान !

पूरब और करो मुह श्याम,
दिशा ज्ञान की विधि आसान !

पश्चिम पीठ के पीछे जानो,
दाँए हाथ दक्षिण तुम जानो,
बाए हाथ को उत्तर मानो !

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