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हिन्दी कविता-मेरा सपना (Hindi poem for kids)





नानी के घर सोया था,
मैं सपने में खोया था !
सपने में काटा तरबूजा !
निकला उसमें से खरबूजा !
जब मैने काटा खरबूजा,
निकला उसमें से फल दूजा !
मैने पूछा उसके नाम,
नानी बोली यह है आम !
आम को मैने जैसे चीरा,
निकला उसमें से एक खीरा !

खीरा लेकर दीदी अकड़ी
पर खीरे की बन गई ककड़ी !
मैने सोचा ककड़ी खा लूँ
पर ककड़ी भी बन गई आलू !
आलू कटा, करी न देर,
पर उसमें से निकला बेर !
बेर पर झपटा एक लंगूर,
पर उसका भी बना अंगूर !
अंगूर हाथ से छूट गया,
सपना मेरा टूट गया !

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