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हिन्दी कविता- भगतन बिल्ली (Hindi poem for kids)





बिल्ली ने एक चादर पाई
बनकर बैठी भगतन बाई,
कहती अब मैं हो गई बुढ़िया
कभी न पकड़ूं चूहे, चिड़िया,
दे देना कुछ दूध मलाई
बैठी नाम जपुँगी भाई

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