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हिन्दी कविता- गणेश जी(Hindi poem for kids)





गणेश जी का रूप निराला है
चेहरा भी कितना भोला भाला है
जिसे भी आती है कोई मुसीबत
उसे इन्ही ने तो संभाला है


मोदक ये खाते लड्डू ये खाते
शिव पार्वती के प्यारे कहलाते
इनका वाहन है मूषक राज
सारे जहाँ पर गणेशा का राज


सबसे पहले होती इनकी पूजा
इनसे बड़ा ना कोई है दूजा
जो भी काम हो सिद्ध कर देते
इसलिए सिद्धि-विनायक कहलाते

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