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हिन्दी कविता-लॅज़्ली एक लड़का था (Hindi poem for kids)





लॅज़्ली एक लड़का था जिसकी मम्मी उसको
           बार बार बहुत थी समझती
बेटा मिट्टी से न खेल देख तेरे छोटे हाथ
          कितने गंदे हो जाते है लॅज़्ली
लॅज़्ली एक बालक था भूल जाता था
          फिर मिट्टी से खेलने लग जाता
एक रात जब वो बिस्तर मे था सो रहा
          उसने ख्वाब देखा कोई उसे बुलाता
वो आसमान मे था खट खटाया फाटक को
          आया बहुत ही खूबसूरत फरिश्ता
लॅज़्ली ने सोचा मेरे हाथ गंदे है
          मॅ कभी नही अन्दर जा सकता
पर खुदा के फरिश्ते ने उससे कहा
          लॅज़्ली हाथ तेरे साफ न हो फिर भी
तेरा दिल तो है साफ अंदर आ खुशी से
          इस पर खुशी से भर गया छोटा लॅज़्ली

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