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हिन्दी कविता- अगर पेड़ भी चलते होते(Hindi poem for kids)





अगर पेड़ भी चलते होते,
कितने मज़े हमारे होते!
बाँध तने में उसके रस्सी,
चाहे जहाँ कहीं ले जाते!

जहाँ कहीं भी धूप सताती,
उसके नीचे झट सुस्ताते!
जहाँ कहीं वर्षा हो जाती,
उसके नीचे हम चिप जाते!

लगती जब भी भूख अचानक,
तोड़ मधुर फल उसके खाते!
आती कीचड़, बाढ़ कहीं तो,
झट उसके उपर चढ़ जाते!

अगर पेड़ भी चलते होते,
कितने मज़े हमारे होते!

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