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हिन्दी कविता-गिनती (Hindi poem for kids)





एक और दो मिल जाएँ तो,
बन जाते हैं तीन !
ज़ोर ज़ोर से बजा रहे हैं,
बंदर सारे बीन!
तीन के बाद आता है नंबर चार,
करती है हिरनी बच्चों से,
बहुत-बहुत सा प्यार !
अब आया है पाँच,
झूम-झूम कर मोर दिखाएँ,
सबको अपना नाच !
पाँच के बाद देखो भैया,
बारी छ की आई !

बंदर भालू सब मिल बोलें
हम है भाई भाई !
पापा भालू झटपट खाकर,
रोटी छ, सात, आठ,
सब बच्चों को याद कराते,
अपना अपना पाठ!
पाठ पढ़कर बाग में खेलो,
अब तो बच गये नौ,
नौ के बाद अब तो भैया,
नंबर दस का आया !
गिनती सीखी, गाकर हमने,
मज़ा बहुत ही आया !

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