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हिन्दी कविता-घड़ी (Hindi poem for kids)





घड़ी सदा यह टिक-टिक करती,
देखो, कभी नही यह थकती,
बिना पाँव के है यह चलती!

रोज सुबह बाबा हैं आते,
इसमें चाबी भरकर जाते,
टिक-टिक-टिक यह करती रहती!

सुनो ध्यान से क्या है कहती,
कहती, समय बड़ा अनमोल,
समझो बच्चो इसका मोल!

कोई भी पल खो न जाए,
गया समय फिर हाथ न आए!

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