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हिन्दी कविता- हे कृष्ण कन्हिया (Hindi poem for kids)





गोकुल की गलियाँ भी देखे तेरी राहे,
यमुना की ल़हेरें भी पूछे,
हमे छोड़ गया तू कहाँ रे?

कलयुग के दुखो को तू, कम करने को आजा,
हे कृष्ण कन्हिया! सखा सुदामा को तारने को आजा


वृंदावन मुरली की तानो को सुनने को तरसे,
मेघ घेर घटा फिर गोवेर्धन पर ना है बरसे
बलरामा के साथ आकर, कोए नई कहानी रचाओ,
हे कृष्ण कन्हिया! तुम फिर आओ

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