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हिन्दी कविता- बचपन की घड़ियाँ (Hindi poem for kids)





जिंदगी तू लौटा दे मुझको,
बचपन की वो घड़ियाँ!
जहाँ माँ के आँचल को हम,
अपना आशियाँ समझते थे!

कागज की कश्ती बनाकर,
खुद को हंसाया करते थे!
और पापा की गाड़ी पर बैठकर,
घूमने जाया करते थे!

स्कूल में टीचर से मस्ती करना,
अच्छा लगता था!
दोस्तों के संग कॅंटीन में,
चाय share करना सच्चा लगता था!

जिंदगी तू लौटा दे मुझको,
बचपन की वो घड़ियाँ!

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