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हिन्दी कविता- बचपन (Hindi poem for kids)





बचपन है ऐसा खजाना
आता है ना जो दोबारा
मुश्किल है इसको भुलाना

वो खेलना, कूदना और खाना,
मौज मस्ती में बलखाना!
वो माँ की ममता, वो पापा का दुलार,
भुलाए ना भूले, वो सावन की फुहार! मुश्किल है इसको भुलाना....

वो कागज की नाव बनाना
वो बारिश में खुद को भिगाना!
वो झूले झूलना और मुस्काना,
वो पतंगों का उड़ना उड़ाना! मुश्किल है इसको भुलाना....

वो यारों की यारी में सब भूल जाना,
और डंडे से गिल्ली को दूर उड़ाना!
वो homework से जी चुराना,
और टीचर के पूछने पर बहाने बनाना! मुश्किल है इसको भुलाना....

वो exam में रटते लगाना,
फिर रिज़ल्ट के डर से घबराना!
वो दोस्तों के साथ साइकिल चलाना
वो छोटी छोटी बातों पर रूठ जाना मुश्किल है इसको भुलाना....

वो माँ का प्यार से मनाना
वो पापा के साथ घूमने जाना
और पिज़्ज़ा और बर्गर खाना
याद आता है अब वो जमाना,
बचपन है ऐसा खजाना,
मुश्किल है इसको भुलाना

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